वरिष्ठ साहित्यकार, कवि और लेखक

Arunkumar Paswan

अरुण कुमार पासवान हिंदी एवं अंगिका के वरिष्ठ साहित्यकार, कवि और लेखक हैं। आकाशवाणी में पूर्व सहायक निदेशक (कार्यक्रम) के रूप में सेवाएँ देने के साथ-साथ उन्होंने साहित्य की विभिन्न विधाओं में उल्लेखनीय योगदान दिया है। एम.ए. की तीन उपाधियों और विधि स्नातक की शैक्षणिक योग्यता से संपन्न श्री पासवान नाटक, कविता, कहानी, लघुकथा, संस्मरण, लेख एवं समीक्षा के क्षेत्र में सक्रिय हैं। उनकी प्रकाशित पुस्तकों में पितृ ऋण, अल्मोड़ा के गुलाब, अपना वतन, जुहू बीच, बातें अलग, कनफुक्का, वाल्मीकि रामायण कथासार और अरुण हैरां हैं प्रमुख हैं। उनकी रचनाएँ हिंदी और अंगिका, दोनों भाषाओं में साहित्यिक अभिव्यक्ति की विविधता को समृद्ध करती हैं। वे नागरी लिपि परिषद् के आजीवन सदस्य एवं संयुक्त मंत्री होने के साथ-साथ ऑथर्स गिल्ड ऑफ इंडिया, दिल्ली चैप्टर तथा अखिल भारतीय सर्व भाषा संस्कृति समन्वय समिति के सदस्य भी हैं।